Suzlon Share Price Target 2026 — रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Suzlon Energy Ltd के शेयरों में ऊपरी स्तरों से भारी गिरावट देखने को मिली है। शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई से करीब 40% टूट चुका है। इसी बीच, हाल ही में आयोजित “India: Shoring up Self-Reliance” कॉन्फ्रेंस के बाद घरेलू ब्रोकरेज फर्म Nuvama Institutional Equities ने कंपनी पर रिपोर्ट जारी की है। फर्म ने बताया है कि अभी प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में कुछ मुश्किलें आ रही हैं जिससे बिज़नेस की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन कंपनी की स्ट्रांग ऑर्डर बुक और ‘Suzlon 2.0’ एक्सपेंशन प्लान्स को देखते हुए ब्रोकरेज ने अपनी पॉजिटिव रेटिंग कायम रखी है।
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Suzlon Energy Share: 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब
शुक्रवार, 13 फरवरी को सुजलॉन के शेयर 2.44% की गिरावट के साथ 45.70 रुपये पर बंद हुए, जो स्टॉक के 52-हफ़्ते के सबसे निचले स्तर 44.80 रुपये के बहुत करीब है। पिछले 52 हफ्तों का रेंज देखें तो यह 44.88 से 74.30 रुपये के बीच रहा है। कंपनी का मार्केट कैप 62,123 करोड़ रुपये है और PE रेश्यो 19.2 है। अगर रिटर्न की बात करें तो पिछले 1 साल में शेयर ने नेगेटिव 14.40% रिटर्न दिया है जबकि इसी दौरान Sensex ने 8.52% का पॉजिटिव रिटर्न दिया है। हालांकि 3 साल का रिटर्न काफी शानदार रहा है और इसने निवेशकों को 404.64% का मुनाफा दिया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद लॉन्ग टर्म के लिए रिस्क और रिवॉर्ड का रेश्यो बेहतर हो गया है।
| Current Price | ₹ 45.70 (13 Feb Close) |
| Day Change | -2.44% |
| Market Cap | ₹ 62,123 Cr |
| 52 Week High/Low | ₹ 74.30 / ₹ 44.80 |
| Stock P/E | 19.2 |
| Live Status | Check on NSE/BSE |
Suzlon शेयर प्राइस टारगेट 2026
Nuvama ने अपनी 12 फरवरी 2026 की रिसर्च रिपोर्ट में शेयर पर Buy रेटिंग बनाए रखी है लेकिन अगले 12 महीनों के लिए टारगेट प्राइस को घटाकर 55 रुपये कर दिया है जो इससे पहले 60 रुपये था। यह नया टारगेट वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई यानी EPS के 30 गुना वैल्यूएशन पर आधारित है। ब्रोकरेज के एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी की लंबी अवधि की कहानी तो मजबूत है लेकिन ऑफटेक लैग्स यानी सप्लाई और डिमांड के बीच की देरी के कारण पास के टारगेट को फिर से तय करना पड़ा है। इसी वजह से Nuvama ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए अपने EPS अनुमानों में 6% से 11% की कटौती की है क्योंकि प्रोजेक्ट्स शुरू होने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है।
क्यों घटाया टारगेट प्राइस?
टारगेट प्राइस कम करने की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग और साइट पर काम पूरा होने के बीच का बढ़ता अंतर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राहकों द्वारा माल उठाने की गति सप्लाई क्षमता से लगभग 15% से 20% पीछे चल रही है। इन देरी का मुख्य कारण साइट से जुड़ी समस्याएं हैं जैसे कि राइट ऑफ वे यानी RoW की दिक्कतें और जमीन अधिग्रहण में देरी के साथ ग्रिड कनेक्टिविटी की समस्याएं भी शामिल हैं। इन जमीनी हकीकतों को देखते हुए Nuvama ने अपने वॉल्यूम अनुमानों को कम कर दिया है। अब वित्त वर्ष 2026 के लिए वॉल्यूम का अनुमान 2.5 गीगावाट है जो पहले 2.75 गीगावाट था और वित्त वर्ष 2027 के लिए इसे 3.2 गीगावाट से घटाकर 3.0 गीगावाट कर दिया गया है। मैनेजमेंट ने बताया है कि इन समस्याओं को सुलझाने के लिए MNRE और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई गई है।
आर्थिक स्थिति और रिकॉर्ड ऑर्डर बुक
कामकाज में आ रही इन दिक्कतों के बावजूद 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही यानी Q3 FY26 के आंकड़े कंपनी की मजबूत पकड़ दिखाते हैं। कंपनी ने इस तिमाही में अब तक की सबसे ज्यादा 617 मेगावाट की डिलीवरी की है। इससे वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कुल डिलीवरी 1,625 मेगावाट हो गई है जो पिछले साल के मुकाबले 66% की बढ़ोतरी है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 42% बढ़कर 4,228 करोड़ रुपये हो गई है जबकि नेट प्रॉफिट यानी PAT 15% बढ़कर 445 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। जनवरी 2026 तक कंपनी के पास 6.4 गीगावाट की रिकॉर्ड ऑर्डर बुक मौजूद है जो अगले 24 महीनों के लिए कमाई की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। इसमें से लगभग 80% पाइपलाइन EPC सेगमेंट में है जहां कंपनी साइट की चुनौतियों को सुलझाने में लगी है।
Suzlon 2.0 और फ्यूचर प्लान
कॉन्फ्रेंस के दौरान Suzlon के मैनेजमेंट ने Suzlon 2.0 के तहत फ्यूचर की ग्रोथ के लिए कई अहम बातें साझा कीं। कंपनी एक नए 5 मेगावाट टरबाइन प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है जो अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है। चीनी कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बावजूद मैनेजमेंट को कम हवा वाली भारतीय साइट्स के लिए अपने कस्टमाइज्ड सॉल्यूशंस पर पूरा भरोसा है। इसके अलावा कंपनी तीन नई AI इनेबल्ड स्मार्ट ब्लेड फैक्ट्रीज लगा रही है ताकि कामकाज को डिजिटल बनाया जा सके और लॉजिस्टिक्स की लागत कम हो सके। मैनेजमेंट ने यह भी बताया है कि वे यूरोप साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में फिर से एंट्री कर रहे हैं और वित्त वर्ष 2028 से एक्सपोर्ट्स से अच्छी कमाई शुरू होने की उम्मीद है।
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